मैक्स हॉस्पिटल मोहाली में रोबोट की मदद से गर्भाशय फाइब्रॉयड हटाने और गर्भाशय पुनर्निर्माण की सर्जरी के बाद एक महिला मां बनी, इस क्षेत्र में अपने किस्म का यह पहला सफल प्रयोग यह इस क्षेत्र में रोबोट की मदद से गर्भाशय से कई फाइब्रॉयड हटाने और गर्भाशय पुनर्निर्माण की सर्जरी के बाद सबसे जल्दी और सहजता से किसी महिला के मां बनने का मामला है

By Firmediac news Nov 19, 2023
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19, नवंबर 2023, मोहाली: इस क्षेत्र के अग्रणी सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में से एकमैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलमोहाली ने रोबोट की मदद से गर्भाशय फाइब्रॉयड हटाने और गर्भाशय पुनर्निर्माण सर्जरी के बाद क्षेत्र की पहली बार एक महिला मां बनी। यह इस क्षेत्र (पंजाबहरियाणा और एनसीआर का उत्तरी हिस्सा) में रोबोटिक मायोमेक्टॉमी (गर्भाशय फाइब्रॉएड हटाने) और रोबोट की मदद से गर्भाशय पुनर्निर्माण सर्जरी के बाद ऐसा पहला मामला है जबकि एक महिला मां बनी। सर्जरी का नेतृत्व मैक्स हॉस्पिटलमोहाली में प्रसूति एवं स्त्री रोग और रोबोटिक सर्जरी की निदेशक डॉ. सीमा वाधवा ने एक नए जमाने की रोबोट-असिस्टेड सर्जरी प्रणालीदा विंची रोबोटकी मदद से किया था।

एक 40 वर्षीय महिला प्राथमिक बांझपन के चिकित्सकीय इतिहास के साथ अपने पेट में दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास आई और उसकी जांच मेंविभिन्न आकारों के कई गर्भाशय फाइब्रॉयड और विकृत एंडोमेट्रियल लाइनिंग दिखे। इससे उसकी गर्भधारण करने और स्वस्थ गर्भधारण करने की क्षमता बाधित हो रही थी। इस निदान के आधार परडॉ. वाधवा ने 8 सेमी से 10 सेमी के बीच के आकार वाले लगभग 13 से 15 फाइब्रॉएड को हटाने के लिए एक रोबोटिक मायोमेक्टॉमी की सिफारिश की। यह एक तरह की सर्जरी हैजिसमें रोबोट-असिस्टेड प्रणाली का उपयोग होता है। यह प्रक्रिया फाइब्रॉयड हटाने तक ही सीमित नहीं थीइसमें गर्भाशय का सावधानीपूर्वक पुनर्निर्माण भी शामिल थाजो इन फाइब्रॉयड के कारण काफी विकृत हो गया था।

इस मामले की सफलता के बारे में, मैक्स हॉस्पिटलमोहाली में प्रसूति एवं स्त्री रोग और रोबोटिक सर्जरी की निदेशक डॉ. सीमा वाधवा ने कहा, “इस पूरी प्रक्रिया के दौरानहमें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालांकिरोबोट-असिस्टेड प्रौद्योगिकी की निपुणतासटीकता और 3डी विज़न के साथहम फाइब्रॉयड को हटाने और गर्भाशय का अधिक सावधानीपूर्वक पुनर्निर्माण कर सके। इस प्रक्रिया की सटीकता के कारण सर्जरी के तुरंत बाद वह गर्भवती हो गई। दा विंची जैसी नए ज़माने की आरएएस प्रौद्योगिकियों के साथहमें अधिक सटीकता और कम रक्तस्राव तथा कम परेशानी के साथ फाइब्रॉयड को हटाने के लिए कीहोल सर्जरी करना होता है। इस मामले मेंमरीज़ की रिकवरी असाधारण थीऔर सर्जरी के केवल एक दिन बाद उसे छुट्टी दे दी गई। इसकी सफलता साबित करती है कि फाइब्रॉयड वाली महिलाएं भी गर्भधारण करने और स्वस्थ गर्भावस्था की उम्मीद कर सकती हैं। यह महिलाओं के लिए उपलब्ध संभावनाओं और विकल्पों का एक प्रमाण हैभले ही कुछ स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हों।”

 

अपना आभार व्यक्त करते हुए, 40 वर्षीय हाल ही में मां बनी महिला ने कहा, “मैं इस पूरी यात्रा में डॉ. सीमा वाधवा और उनकी टीम की मदद के लिए बहुत आभारी हूं। पहले तो मैं आशंकित थीहालांकिमेडिकल टीम की विशेषज्ञता और देखभाल ने मुझे हर कदम पर आश्वस्त किया। आजमैं एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देकर बहुत खुश हूं। टीम का समर्पण और सर्जरी में इस्तेमाल की गई नई रोबोटिक तकनीक मेरे जैसी महिलाओं को आशा देती है जिन्होंने चुनौतियों का सामना किया हैं। मैं इस तरह की उल्लेखनीय देखभाल पाकर वास्तव में भाग्यशाली महसूस कर रही हूं।”

शुरुआत में ही पता चलने और हस्तक्षेप से प्रजनन स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद मिलती है। उचित उपचार तय करने में फाइब्रॉयड का आकार और उसके होने की महत्वपूर्ण हैं। ऐसे मामलों में जहां बड़े फाइब्रॉयड यूटेराइन लाइनिंग के पास स्थित होते हैं और बर्थ कनाल में बाधा डालते हैंउन्हें सर्जरी के ज़रिये हटाने की ज़रूरत पड़ सकती है।

 

 

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